क्या आप अपने दादा के पापा को जानते हैं?
जानिये अपने पूर्वजों को
 
स्मारिका का अर्थ ही है किसी अर्थपूर्ण समारोह का स्थायी संस्मरण, `शब्द प्रतीक´। वो कृति जो उस उत्सव का आशय समेट कर आपको कोई मूल्य सौंपे कोई दिशा दे जो आपके लिए मंगलमय हो इस स्मारिका में हम भार्गव समाज के सम्मान और उसकी वैभवपूर्ण पहचान के लिए कुछ वंश वृक्ष यथा :- गोलिश-शकरा, गागलश-अम्बा, एवं काश्यप-अर्चट, काश्यपि-जाखन की जो भी जानकारी उपलब्ध हो सकी है, वह प्रकाशित कर रहे हैं। अगर पाठकों को इसमें किसी भी प्रकार की कोई त्रुटि महसूस हो या कुछ सुधार चाहते हों अथवा भार्गव परिवारों के वृक्षों को आगे बढ़ाना चाहते हों तो कृपया हमें अपना उदार सहयोग प्रदान करें। जिससे आने वाले समय में हम इसको आज की पीढ़ी तक अपडेट करके भलीभांति प्रस्तुत कर सकें।

मानव समाज अपने विशिष्ट गुणों एवं सार्थक कर्मों के बहाने से अलग-अलग कुलों में अथवा वगोZं में बंटा हुआ मिलता है। उनकी कुल परम्पराएं अपने साथ अपना संक्षिप्त इतिहास अपना निजी गौरव अपने वंश वृक्ष के रूप में समेटे मिलती हैं। यहां इस बार हम वंशवृक्ष की प्रमाणिकता के साथ कुछ गोत्र-परिवारों का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

हमारे गोत्र और कुलदेवी कुछ इस प्रकार से हैं

गोत्र - कुलदेवी
बंदलश - नीमा, नागन, अंचल, खूखस, अचला, मंगोठी, ब्राह्मणी, नीमच नागन-फूसन, अरचट, बबूली, सिलदाव, तम्बा, मुंगेरी, माहुल शिल्डी
गागलश - चौमुंडा, नीमा, रोज़ा, ईंटा, अम्बा, रौसा, नागन, चौडा शकरा
बचलश - जाकुम्बर देवी, शीला, नागन, अंचल, नागन-फूसन, बमन, मुंदेरी फूसन, अचला, ब्राह्मणी, चक मु¡डेरी, चौमुंडा, नीमा, तनवा, ईंटा, नायन, तम्बा, निर्मन, कनिका, नीमच, नागिन,नायन-नागन
गोलश - शकरा, ईंटा, नागन, नागन-फूसन, मनमुंडेरी
कश्यप - सनमत्, जीवन, अर्चट, शानडिल्य, शकरा, अचला, सोना, जाखन भैंसचण्डी, चेन्टा, चमल, सुनत, चावला, सोहन शुक्ल
कुचलस - हलहल, नागन नागन-फूसन, ईंटा
गालव - शकरा
वत्स - नागिन, ऊखल
अघZही - नागन